कविता
मेरा भारत,दिल में रखी गंदगी को यहां धोना है।,मिट्टी की तारीफ क्या करे, 💟
मेरा भारत
लेखक - श्रवण कुमार (सिरौली)
दिल में रखी गंदगी को यहां धोना है।
मिट्टी की तारीफ क्या करे,
मिट्टी भी यहां सोना है।
कहीं फसल से चमचमाती खेत है।
तो कही बालू जैसी रेत है।
हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई को देखो ,
ये सभी नेक है।
ये दुनिया रंग बिरंगी है,
फिर भी यहां सब एक है।
धरती की प्यास को बुझते,
बारिश या हिमालय के नदी बहते है।
लहलहाती फसल को देखो,
ये खेत के गहने है।
भोजन वस्त्र और आवास ये धरती की देन है।
फिर भी धरती को देखो सहनशीलता की मूरत है।
यहां न कोई रावण है ,
न कोई लादेन है।
यहां के राजा को देखो,
ये जनता की देन है।
इस देश की प्रगति,विकास की शिखर चूमती है।
और यहां की सैनिक भी जी जान से रक्षा करती है।
तभी तो देश की जनता ,
चैन की नींद सोती है।
किसान धरती की शान है,
विकास इसका प्रमाण है।
तभी तो कहते है मेरा भारत महान है।

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Thank You